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  • Abhishek Chourasia

परिवर्तन

ईश्वर की सबसे सुन्दर निर्मिति केवल प्रकृति है बीते हजारो लाखो वर्षो में प्रकृति ने जाने कितने परिवर्तन किये होंगे जिनसे हम आज अल्प ही परिचित हो पाए है और क्या पता भविष्य में उन परिवर्तनों को कभी समझ पाएंगे| जिस प्रकार ब्रम्हांड के मंडलो को विशेष तंत्रो व अन्य साधनो से लगातार नजर रखी जा रही है उसी के कारण हम जान पाते है की उन मंडलो में छनभर में अद्भुत, सुन्दर व भयानक परिवर्तन दिखाई देते है| जिसके न कोई प्रमाण होते है और न कोई कारण जिसके आधार पर उस परिवर्तन की परिस्थितियों को बयान कर सके केवल तर्क ही रहता है यहाँ हमारा विज्ञान अथवा प्रसिद्धिया धरि की धरि रह जाती है|

ये भी तो जरूरी नहीं है की प्रत्येक परिवर्तन के रहस्यों को हम समझ पाएंगे फिरभी प्रकृति का परवर्तन निरंतर सुरु रहेगा और शायद यही परिवर्तन आज हमे जीवित रखा है| और यही किसी समय हमारे विनाश का भी विषय बनेगा हमे इस अंत को भी एक बड़े परिवर्तन के रूप में भुगतना ही होगा उस वक़्त हमारे पास कोई कारण नहीं होगा| वह छन तो उस पेड़ की झड़ती हुई पत्तिया व फूलो के समान होगा जो छनभर में पेड़ से टूट कर बिछड़ जाते है| उस छन के बीतने के बाद न कोई तर्क-वितर्क होगा और कोई सबूत भी नहीं बचेगा जो उस परिवर्तन को परिभाषित कर पायेगा केवल रह जायेगा परिवर्तन.......


"परिवर्तन का तात्पर्य केवल संकल्पनाओं साहस व नविन सृजन से है|"


परिवर्तन की परिभाषाये अपनी परिस्तिथि और अनुभवो पर किया है, जिसे गलत नहीं ठहराया जा सकता इन्ही अनुभवों पर आधारित इस विषय पर मैंने कुछ पेंटिंग, ग्राफ़िक और ड्राइंग कोमाध्यम से सृजन करने का प्रयास किया है इन सभी विविध आकृतियों में केवल 'परिवर्तन' को दिखाने की कोशिश किया है| इन सभी कृतियो के अलग-अलग तर्क लगाए जा सकते है|


मै इन कृतियों के माध्यम से बताना चाहता हु की जो चीज हमे पसंद नहीं होती है उसे बदलने का लगातार प्रयास करते है| यह बदलाव करना भी चाहिए यदि कुछ परिस्तिथियो के कारण उन्हें बदल नहीं पाए तो हमे स्वम् के ही स्वभाव बदलना पड़ता है या यही परिवर्तन हमे और सामने वाले को परेशान नहीं होने देगा| मैंने कुछ कृतियों में उन छोटे-छोटे परिवर्तनो को दिखाने का प्रयास किया है यही जिंदगी की असली वजह है इसके लिए दो चीजे बहोत ही महत्वपूर्ण है एक सजक रहना और दूसरा स्वीकार करने का साहस भी होना चाहिए, कभी-कभी कुछ लोगो को परिवर्तन करना पसंद नहीं होता लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचता है, और उस आपदा की इस्थति में परिवर्तन करना ही एक विकल्प रहता है| तब केवल परिवर्तन ही रह जाता है|

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