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  • Abhishek Chourasia

"शंखनाद"

शंखनाद का आशय उसकी ध्वनि और शंख में गूंजने वाली गूंज से है। शंखनाद कहने मात्र से रामायण, महाभारत के विश्व युद्ध की याद दिलाता है, जो शंखनाद की गर्जना पर प्रारंभ हुआ और शंखनाद की गर्जना के विजयघोष के साथ अंत हुआ था। शंखनाद का महत्व सनातन धर्म में वेदकाल से चला आ रहा है। अथर्व वेद में शंखनाद के धार्मिक महत्व का वर्णन किया गया है और साथ में शंखनाद के वैज्ञानिक तर्क भी लगाए गए है।

पूजा-पाठ, उत्सव, हवन, युद्ध, विवाह, राज्यभिषेक, आदि शुभ अवसरों पर शंखनाद देखने को मिलता है। जो परिवर्तन का प्रतिक होता है। और शंख को अपने कानो से लगाने पर हमे उसकी विशिष्ट गूंज सुनाई देगी यह गूंज धीमी गति में गूंजती है। यह शांत गूंज हमारे मन व मस्तिक को चित्त की अवस्था में ले जाती है। हम उस समय छोटे से शंख के ध्वनि की दुनिया में खो जाते है। और शांति की प्राप्ति का अहसाह होने लगता है। परन्तु इस गूंज में महासागर के तूफानी लहरे समाई होती है। शंख की शांत गूंज को समझना जो हमारी कल्पना के परे है। जिसकी गहराई में डूबने पर हर बार अलग-अलग अनुभव की अनुभूति होती है। जिसे शायद किसी शब्द में बांधना व समझना मुमकिन नहीं है। परन्तु यह गूंज हमारी दिशा, विचारधारा को बदलने की ताखत रखता है। वैसे तो शंख देखने में ठोस होता है। यह कठोरता उसके आत्मबल और गूंज उतनी ही गहराई को छूती है। जिसकारण शंखनाद नूतन सुरुवात का प्रतिक है। शंखनाद की ध्वनि बलशाली शेर की दहाड़ के समान होता है। जिसके कारण प्रत्येक व्यक्ति का ध्यान उसकी और एकाग्र हो जाता है।

इस पेंटिंग का शीर्षक "शंखनाद" रखा है। इस पेंटिंग में बाघ रूपी मानव को शंख की गूंज में मग्न दिखाने की कोशिश किया है। बाघ का मुख में शांत हसि भी दिखाई देगी और उसके कान के पास शंख है। उस शंख की गूंज उसके कान महसूस कर रहे है। यह शांत बाघ की रचना मैंने पहेली बार किया है। बाघ की बंद आखे और इसके बैठने की रचना चित्त अवस्था को दर्शा रहा है।

यह शंखनाद और इसकी गूंज किसी बड़े परिवर्तन का परिचय करा रहा है। जिसके कारण बाघ अपने आने वाले परिवर्तन, शफलता, महत्व इत्यादि बातो को महसूस कर रहा है। और परिवर्तन तो प्राकृति का एक अहम हिस्सा है। प्रकृति और बाघ यह दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू है। दोनों एक दूसरे से जुड़े है। जिसमे कई प्रकार के वन्यजीवों और सभ्यताओ को ख़त्म होते देखा गया है। परन्तु अब वक्त है परिवर्तन का।

जिसके लिए शंखनाद का होना जरूरी है।

शंखनाद-एक परिवर्तन……….

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